भारत एक कृषि प्रधान देश है और यहाँ की अर्थव्यवस्था की रीढ़ खेती मानी जाती है। प्राचीन काल से ही भारत में कृषि का विशेष महत्व रहा है। आज भी देश की एक बड़ी जनसंख्या अपनी आजीविका के लिए खेती पर निर्भर है। खेतों में अन्न उपजाकर किसान न केवल अपने परिवार का पालन-पोषण करता है, बल्कि पूरे देश का पेट भी भरता है। इसलिए कहा जाता है कि “किसान देश का अन्नदाता होता है।”
खेती का सबसे बड़ा महत्व यह है कि यह हमें भोजन प्रदान करती है। चावल, गेहूँ, दालें, सब्जियाँ, फल, तेलहन आदि सभी कृषि उपज ही हैं। इनके बिना मानव जीवन की कल्पना भी नहीं की जा सकती। भोजन के साथ-साथ कृषि से हमें कपास, जूट, गन्ना जैसी फसलें मिलती हैं, जिनसे वस्त्र, कागज और चीनी जैसे उद्योग चलते हैं। इस प्रकार खेती अनेक उद्योगों को भी आधार प्रदान करती है।
भारत में रोजगार का एक बड़ा साधन भी खेती है। गाँवों में रहने वाले लोग प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कृषि से जुड़े होते हैं। खेतिहर मजदूर, बीज विक्रेता, खाद और कीटनाशक उद्योग, परिवहन तथा मंडी व्यवस्था—all खेती पर ही निर्भर करते हैं। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होती है और पलायन की समस्या कम होती है।
खेती का पर्यावरण से भी गहरा संबंध है। हरी-भरी फसलें वातावरण को शुद्ध करती हैं और जैव विविधता को बनाए रखने में सहायक होती हैं। यदि कृषि में प्राकृतिक और जैविक तरीकों को अपनाया जाए तो मिट्टी की उर्वरता बनी रहती है और जल संरक्षण भी होता है। आज के समय में टिकाऊ और जैविक खेती की आवश्यकता और भी बढ़ गई है।
हालाँकि किसानों को अनेक समस्याओं का सामना करना पड़ता है। अनियमित वर्षा, सूखा, बाढ़, महंगे बीज और खाद, कम समर्थन मूल्य तथा कर्ज जैसी समस्याएँ खेती को कठिन बना देती हैं। इसके बावजूद किसान कठिन परिश्रम करके देश के लिए अन्न उपजाता है। सरकार द्वारा सिंचाई योजनाएँ, फसल बीमा, न्यूनतम समर्थन मूल्य और आधुनिक तकनीक उपलब्ध कराने से किसानों की स्थिति में सुधार हो सकता है।
आज आधुनिक कृषि तकनीकों जैसे ट्रैक्टर, हार्वेस्टर, ड्रिप सिंचाई और उन्नत बीजों के प्रयोग से उत्पादन बढ़ रहा है। यदि किसान शिक्षा और तकनीक से जुड़ें तो खेती को और अधिक लाभकारी बनाया जा सकता है।
अंत में कहा जा सकता है कि खेती केवल एक व्यवसाय नहीं, बल्कि जीवन का आधार है। कृषि के बिना मानव सभ्यता संभव नहीं है। इसलिए हमें किसानों का सम्मान करना चाहिए और कृषि के विकास के लिए निरंतर प्रयास करने चाहिए। सशक्त किसान ही सशक्त भारत की पहचान है।