महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA) – परिचय
महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA), जिसे आमतौर पर मनरेगा कहा जाता है, भारत सरकार की एक प्रमुख सामाजिक सुरक्षा एवं रोजगार गारंटी योजना है। यह अधिनियम 5 सितंबर 2005 को संसद द्वारा पारित किया गया था और ग्रामीण भारत में आजीविका सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम माना जाता है।
इस योजना के अंतर्गत प्रत्येक ग्रामीण परिवार के वयस्क सदस्यों को प्रति वित्तीय वर्ष न्यूनतम 100 दिन का अकुशल मजदूरी आधारित रोजगार प्रदान करने की कानूनी गारंटी दी जाती है। मनरेगा के अंतर्गत कार्य करने वाले श्रमिकों को सरकार द्वारा निर्धारित सांविधिक न्यूनतम मजदूरी दी जाती है, जो समय-समय पर राज्यों के अनुसार परिवर्तित होती रहती है।
इस योजना का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में
- बेरोजगारी कम करना
- ग्रामीण लोगों की क्रय शक्ति बढ़ाना
- पलायन रोकना
- टिकाऊ ग्रामीण परिसंपत्तियों (जल संरक्षण, सड़क, सिंचाई आदि) का निर्माण करना है।
मनरेगा योजना की मुख्य विशेषताएं
- ✔️ प्रति परिवार 100 दिन का रोजगार
- ✔️ पुरुष एवं महिला श्रमिकों को समान मजदूरी
- ✔️ महिलाओं की भागीदारी लगभग 33% से अधिक
- ✔️ सार्वजनिक कार्यों पर आधारित रोजगार
- ✔️ पारदर्शिता के लिए जॉब कार्ड व्यवस्था
- ✔️ समय पर रोजगार न मिलने पर बेरोजगारी भत्ता

मनरेगा की प्रक्रिया (कैसे मिलता है काम?)
ग्रामीण परिवार के वयस्क सदस्य ग्राम पंचायत में अपना नाम, आयु, पता एवं फोटो जमा करते हैं। सत्यापन के बाद पंचायत द्वारा जॉब कार्ड जारी किया जाता है।
जॉब कार्ड धारक व्यक्ति पंचायत या कार्यक्रम अधिकारी को कम से कम 14 दिनों के कार्य हेतु लिखित आवेदन देता है।
यदि निर्धारित समय में रोजगार उपलब्ध नहीं कराया जाता है, तो श्रमिक को बेरोजगारी भत्ता देने का प्रावधान है।
मनरेगा में वित्तीय व्यवस्था
- केंद्र सरकार
- मजदूरी लागत का पूरा वहन
- सामग्री लागत का 75%
- प्रशासनिक खर्च का हिस्सा
- राज्य सरकार
- बेरोजगारी भत्ता
- सामग्री लागत का 25%
- राज्य स्तर पर प्रशासनिक खर्च
मनरेगा की आलोचनाएं और चुनौतियां
मनरेगा विश्व की सबसे बड़ी रोजगार गारंटी योजनाओं में से एक है, लेकिन इसके साथ कुछ गंभीर चुनौतियां भी जुड़ी रही हैं:
- ❌ भ्रष्टाचार और फर्जी जॉब कार्ड
- ❌ स्थानीय स्तर पर धन का दुरुपयोग
- ❌ काम की गुणवत्ता पर सवाल
- ❌ स्थानीय जरूरतों के बजाय मानकीकृत कार्य
- ❌ बिहार के पूर्वी चंपारण (हरसिद्धि प्रखंड) में सितंबर 2024 में करोड़ों रुपये के फर्जीवाड़े का मामला
इन कारणों से सरकार को निगरानी, सोशल ऑडिट और डिजिटल ट्रैकिंग पर अधिक ध्यान देना पड़ा।
🔵 विकसित भारत ग्राम (VB-GRAM-G) अधिनियम, 2025 – संक्षिप्त परिचय
Viksit Bharat Gram (VB-GRAM-G) Act, 2025 भारत सरकार की एक नई और दूरदर्शी ग्रामीण विकास पहल है, जिसका उद्देश्य केवल रोजगार नहीं बल्कि समग्र ग्राम विकास सुनिश्चित करना है।
यह अधिनियम
- रोजगार
- कौशल विकास
- डिजिटल ग्राम
- स्मार्ट इंफ्रास्ट्रक्चर
- आत्मनिर्भर गांव
जैसे पहलुओं को एकीकृत करता है।
📊 MGNREGA बनाम VB-GRAM-G Act, 2025 (तुलनात्मक तालिका)
| बिंदु | MGNREGA | VB-GRAM-G Act 2025 |
|---|---|---|
| उद्देश्य | रोजगार गारंटी | समग्र ग्राम विकास |
| रोजगार | अकुशल मजदूरी | कुशल + अर्ध-कुशल |
| अवधि | 100 दिन | परियोजना आधारित |
| तकनीक | सीमित | डिजिटल व AI आधारित |
| फोकस | मजदूरी | आत्मनिर्भरता |
| पारदर्शिता | जॉब कार्ड | डिजिटल ट्रैकिंग |
🔚 निष्कर्ष
जहां MGNREGA ने ग्रामीण भारत को रोजगार सुरक्षा दी, वहीं VB-GRAM-G Act, 2025 ग्रामीण विकास के अगले चरण की ओर कदम है। दोनों योजनाएं अपने-अपने समय की जरूरत हैं। मनरेगा तात्कालिक राहत देता है, जबकि विकसित भारत ग्राम योजना स्थायी समाधान प्रस्तुत करती है।